Thursday, February 28, 2013

Dolton Comics (DC) - Chandamama (डॉल्टन कॉमिक्स डी सी -चंदामामा)

डॉल्टन कॉमिक्स डी सी, चंदामामा के प्रकाशकों के द्वारा अमेरिका की विश्व प्रसिद्ध प्रकाशन संस्था डॉल्टन कॉमिक्स के लोकप्रिय पात्रों की चुनिन्दा कहानियों का पुनर्प्रकाशन का प्रयास था. यह चंदामामा के द्वारा विश्वस्तरीय पात्रों का भारतीय जनमानस से परिचय कराने की श्रंखला में एक कदम थ. इस प्रकाशन के अलावा उनके द्वारा वाल्ट डिज्नी की शानदार कहानियों और पात्रों को भी भारत में प्रकाशित किया गया था - वाल्ट डिज्नी की विचित्र पूरी और बुक शेल्फ सीरिज के माध्यम से. 
इस कॉमिक्स का प्रथम अंक 1 Sep 1982 के साथ उपलब्ध हुआ था. बड़े आकार के कुल 32 पृष्ठों के साथ (आवरण मिलाकर) पूर्णतः  रंगीन इस कॉमिक्स की शुरूआती कीमत रखी गयी थी 1.75 रू.
शुरुआत के पृष्ठ में स्थायी स्तम्भ के रूप में पाठकों के पत्र 'आपने लिखा है' में प्रकाशित होते थे. साथ ही वर्तमान अंक और आगामी अंक के कहानियों का संक्षित विवरण भी दिया जाता था. साथ ही समसामयिक समाचार और अन्य ज्ञान वर्धक जानकारियों का समावेश भी इन पृष्ठों में होता थ. 
सामान्य तौर पर एक कॉमिक्स में 3 से 4 कथाएँ होती थी जिनमे सुपरमैन, सुपरगर्ल, सुपरबॉय, बैटमैन, बैटगर्ल, रोबिन, ग्रीन एरो, ग्रीन लेन्टर्न, किड फ्लैश आदि की कहानियाँ प्रकाशित होती थी।
ये कॉमिक्स पाक्षिक (महीने में दो बार) प्रकाशित होती थी जिसमे अंक वर्ष को और क्रमांक उस वर्ष में प्रकाशित कॉमिक्स की संख्या को दर्शाता था जैसे अंक 2 क्रमांक 14  दुसरे वर्ष (1984) में प्रकाशित 14 वी  कॉमिक्स थी .
यह कॉमिक्स श्रंखला केवल एक हद तक ही सफल हो पाया था. जहां तक मुझे जानकारी है यह तीन वर्ष तक और लगभग 70+ अंकों के साथ समाप्त हो गयी थी . मैंने आज तक इसका वर्ष 4 का कोई भी अंक नहीं देखा है. 

नीचे इस प्रकाशन के प्रथम वर्ष के अंकों के मुखपृष्ठ प्रस्तुत हैं - जैसे ही अगले अंकों के कवर्स प्राप्त होंगे उन्हें भी अपलोड कर दिया जाएगा-
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4 comments:

Shivkumar Vaishnaw said...

Good info, Anupam Bhai

Comic World said...

एक बेहतरीन पोस्ट अनुपम भाई । एक ज़माने में डॉलटन कॉमिक्स मेरे बहुत पसंदीदा हुआ करती थीं लेकिन इनके निम्नस्तरीय हिंदी अनुवाद ने हिंदी हलके में इनकी लोकप्रियता को सीमित रखा जो कालांतर में गिरती गयी और नतीजतन इनका प्रकाशन बंद हो गया । लेकिन जो भी हो हिंदुस्तानी हिंदी पाठकों को सुपरमैन इत्यादि से परिचित करवाने वाला यही पहला प्रकाशन था जो इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि है ।

Gaurav Arya said...

very nice post Anupam bro. Big Thanks for this.

Dinesh Shrinet said...

अनुपम जी, इन कॉमिक्स को मैं कई सालों से खोज रहा था। इनके पहले अंक से लेकर आखिरी महीनों तक के अंक मेरे पास थे। अब नहीं हैं :(
यह बात सही है कि इनका अनुवाद अच्छा नहीं था। वर्तनी की गलतियां भी बहुत ज्यादा थीं। दरअसल चंदामामा वालों ने जब-जब कॉमिक्स निकाली यह समस्या उनके साथ रही। चंदामामा क्लासिक्स और कॉमिक्स के साथ भी यही दिक्कत थी। मगर इस सबके बावजूद इन कॉमिक्स के जरिए मुझे कई शानदार कहानियों को पढ़ने का मौका मिला। जो शायद कॉमिक के क्लासिक दौर की बेहतरीन उपलब्धियों में से एक था। इन कहानियों में गहरा नैतिक संदेश भी होता था। मैकियावेली के नाम से तो मैं सबसे पहले ग्रीन लैंटर्न की एक कहानी के जरिए ही परिचित हुआ। बहरहाल मुझे बेचैनी से इंतजार है कि कब आप इन कहानियों को अपलोड करेंगे।